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Thursday, 3 June 2021

June 03, 2021

विद्युत आवेश की परिभाषा क्या है electric charge in hindi , आवेश के गुण , SI , CGS इकाई मात्रक

विधुत आवेश :- 600 ईसा पूर्व ग्रीस देश के निवासी थेल्स ने देखा कि एम्बर को ऊनी वस्त्र से  रगड़ा गया तो वह हल्की वस्तुओं को अपनी और आक्रर्षित करता है|

# :- एम्बर शब्द का अर्थ इलेक्ट्रॉन होता है|
                  #Kulam law#

आवेश क्या है ?

किसी भी पदार्थ के निर्माण के लिए मूल कणो में से आवेश भी एक है , हालांकि आवेश की कोई निर्धारित परिभाषा (definition) नहीं है लेकिन आवेश को इसके (आवेश) के द्वारा उत्पन्न प्रभावों के माध्यम से समझाया जाता है|


  1. वैसा पदार्थ जिसे आ जाने से हल्की वस्तुओं को अपनी और आक्रर्षित करने का गुण आ जाता है, आवेश कहलाता है|

2. किसी वस्तु की विधुतीय अवस्था को जिस भौतिक राशि से मापी जाती है,उसे विधुत आवेश कहते है| 

उदाहरण:



कांच की छड़ को जब रेशम के कपडे से रगड़ा जाता है तो कांच की छड़ पर धन आवेश तथा रेशम के कपडे पर ऋण आवेश आ जाता है।
             

आवेश का गुण :
       
1. समान आवेश के बीच प्रतिक्रर्षण (विकर्षण) गुण होता है
              


2. असमान आवेश के बीच आक्रर्षण गुण होता है|
       


3. आवेश अदिश राशि है|

4. आवेश मे सिर्फ परिमाण होता है|

4. एक इलेक्ट्रॉन का आवेश (e = 1.6×10^-19 कूलाम) एक प्राथमिक इकाई माना जाए अर्थात आवेश का क्वांटम तो किसी वस्तु पर आवेश e के पूर्णांको के गुणनफल के बराबर होगा अर्थात q = ± ne , यहाँ n = 1 , 2 , 3 , 4 . . . .. .


5. आवेश में मुक्त इलेक्ट्रॉन होता है|

आवेश की इकाई :

 SI मात्रक या इकाई = कुलाम [1 कूलाम = 1 एम्पियर x 1 सेकंड]

esu = स्थिर वैद्युत इकाई

emu = विद्युत चुम्बकी इकाई

{ 1कुलॉम आवेश = 6.25×10^18 इलेक्ट्रॉन }

{ 1 कुलॉम आवेश =3×10^ 9 स्टेट कुलॉम }

आवेशों के प्रकार

वैजामिन फ्रैंकलिन के अनुसार आवेश दो प्रकार के होते हैं|

1. धनावेश :- जब वस्तु इलेक्ट्रॉन का त्याग करती है तो वह वस्तु धनावेश होती है|

2. ॠणावेश :- जब वस्तु इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करती है तो वह वस्तु ॠणावेश होती है|


                                                                           

Monday, 31 May 2021

May 31, 2021

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता क्या है electric field intensity in hindi , विधुत क्षेत्र की तीव्रता का SI मात्रक , विमीय सूत्र

 विद्युत क्षेत्र ( Electric Field):->

किसी विद्युत आवेश तथा आवेशों के समुदाय के चारों और का वह क्षेत्र जिसमे कोई अन्य आवेश एक विद्यत बल का अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है| कई आवेशो उपस्थित से सबके विधुत क्षेत्र परस्पर अध्यारोपित हो जाते हैं।

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ( Intensity of Electric field ) :-

1st परिभाषा

 विधुत क्षेत्र में किसी बिन्दु पर रखे धन परीक्षण आवेश पर लगने वाले बल तथा धन- परीक्षण आवेश के परिमाण की निष्पति को उस बिन्दु पर विधुत क्षेत्र की तीव्रता कहते हैं।

2nd परिभाषा

एकांक आवेश के कारण उत्पन्न विधुतीय बल को विधुतीय तीव्रता कहा जाता है।

इसे प्रायः  Ē ( सदिश E ) से प्रदर्शित करता है।

एकांक आवेश के लिए विधुतीय बल ( F )= (E -- विधुतीय तीव्रता)

q0आवेश के लिए विधुतीय बल  F= q• E

Or=q0 • E= F ( सदिश रूप में)


 






# परीक्षण आवेश इतना छोटा होता है कि उसे विधुत क्षेत्र में लाने पर विधुत क्षेत्र की अवस्था ( परिमाण तथा दिशा) में कोई परिवर्तन नहीं होता।

विधुत क्षेत्र की तीव्रता एक सदिश राशि है तथा इसकी दिशा वही होती है।


विद्युतीय तीव्रता का SI मात्रक :-

विधुतीय तीव्रता का SI मात्रक न्यूटन / कूलॉम ( N/C ) होता है।

विद्युतीय तीव्रता= विधुतीय बल/ आवेश

                    Ē=N/C,

                         N•C^-1


जहाँ 

N= न्यूटॉन है।

C= कूलॉम है। 


विद्युतीय तीव्रता की विमा :-

विधुतीय तीव्रता का विमा [ MLT^-3A^-1 ] है। 

विधुतीय तीव्रता= विधुतीय बल/आवेश

Ē=MLT^-2/AT1 

  = MLT^-3A^-1


# :-> जहाँ 

=> बल की विमा ( MLT^-2 ) है।

=> आवेश की विमा ( AT ) है|

May 31, 2021

आवेश का क्वाण्टमीकरण(QUANTISATION OF CHARGE)


1.आवेश का वह न्यूनतम मान ( मुल आवेश) जिसका आदान- प्रदान प्रकिया मे उपयोग किया जाता है, उसे उस भौतिक राशि का क्वांटम तथा इस प्रक्रिया को आवेश का क्वांटीकरण कहते हैं|
#:- इस न्युनतम आवेश को मुल आवेश कहा जाता है|

                      
          मुल आवेश  (कूलॉम्ब में)=e= 1.6×10−19 C            

2. किसी भी आवेश को अनिशिचत रूप में विभाजित नहीं की जा सकती है, इसके न्यूतम मान को मौलिक आवेश कहा जाता है, इस क्रिया को विधुत आवेश का क्वांटीकरण कहा जाता है|

3. आवेश का वह न्यूनतम मान (e) जिसका आदान-प्रदान प्रक्रिया में उपयोग किया जा सकता है उसे उस भौतिक राशि का क्वाण्टम तथा इस प्रक्रिया को क्वांटीकरण कहते है। आवेश का स्थानांतरण e के गुणज के रूप में होता है तथा न्यूनतम मान 1e होता है। उदाहरण : ... एक समान वेग से गतिशील आवेश वैधुत क्षेत्र तथा चुंबकीय क्षेत्र दोनों उत्पन्न करता है। 
                

May 31, 2021

बहुल आवेशों के बीच मध्य बल एवं अध्यारोपण का सिद्धान्त superposition principle of coulomb’s law in hindi

बहुल आवेशों के बीच बल:-

यदि किसी आवेश पर एक से अधिक अन्य आवेश बल लग रहा है तो आवेश पर परिणामी बल सभी बलो के सदिश योग के बराबर होता है

माना कि हमारे पास कोई q1 आवेश है, इस पर एक से अधिक आवेश बल लगा रहे हैं जिसका नाम q2,q3,----qn है|जो q1 आवेश पर बल आरोपित करेंगे|हम सभी आवेश को धनात्मक मानते हैं चाहे तो हम इसे ऋणात्मक भी मान सकते हैं हम सभी आवेश को  धनात्मक माने है इसलिए q2,q3---qn q1 पर प्रतिकर्षण बल लगाएगा कूलाम के अनुसार आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होता है|

अब हम चित्र से स्पष्ट करेंगे

चित्र से 


------- (1)




------- (2)





------- (3)



समीकरण (1) और (2) तथा (3) से q1 पर परिणामी बल 


Extra 

विद्युत आवेशों के बीच लगने वाला पारस्परिक विद्युत बल्ब कूलाम के नियम से प्राप्त होता है| किंतु यदि किसी आवेश के चारों ओर बहुल (एक से अधिक) आवेश स्थित हो तो आवेश पर लगने वाला परिणामी विद्युत बल अध्यारोपण के सिद्धांत से प्राप्त होता है|







May 31, 2021

विधुत आवेश के गुणधर्म/मुल गुण (Fundamental properties of Electric Charge)

अब तक हमने ये देखा कि आवेश दो प्रकार के होते है

1) : धनात्मक

2) : ॠणात्मक

समान आवेश के बीच प्रतिक्रर्षण ( विक्रर्षण ) गुण होता है|

असमान आवेश के बीच आक्रर्षण गुण होता है|

अब हम विधुत आवेश के कुछ अन्य महत्वपूर्ण गुणो के बारे मे अध्ययन करेंगे|

1* विधुत आवेश की योज्यता (Additivity,Addition of Electric Charges) 

आवेशो की योज्यता का वह गुण जिस कारण दो बिंदु आवेश q1 और q2 हो तो इस निकाय का कुल आवेश q1 तथा q2 को बीजगणितीय रीति से जोड़ने पर प्राप्त होता है , अर्थात् आवेशों को वास्तविक संख्याओं की भाँति जोड़ा जा सकता है अथवा आवेश द्रव्यमान की भाँति अदिश राशि है ।

आवेश को  धनात्मक तथा ॠणात्मक चिन्ह के साथ लिखा जाता है| 

सुत्र :- आवेशो की योज्यता (q) =q1+q2+q3+------+qn

विद्युत आवेशों की योज्यता का उदाहरण :-

Ex- किसी वस्तु पर पांच आवेश है+2q,+8q, -4q, -6q तथा +7q तो विद्युत आवेशों की योज्यता ज्ञात करे? 

इसलिए कुल आवेश q=2+8+(-4)-6+7
                               =10-4+1
                                 =6+1
                                  = 7c Ans

Note:-अगर किसी वस्तु पर कुल आवेश ज़ीरो है तो वह वस्तु उदासिन माना जाता हैं|
 
2*विधुत आवेश का संरक्षण सिद्धांत(conversation of charges)  


आवेश का संरक्षण सिंधान्त  बैैैैैैंजमिन फ्रैकलिन  ने दिया था। इसके अनुसार आवेश ना तो उत्पन्न किया जाता है और ना ही नष्ट किया जाता है, बल्कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित होते हैं यह ब्रह्मांड में सदैव संरक्षित रहते है|

उदाहरण :-

1) इलेक्ट्रॉन व पॉजिट्रॉन पर ठीक बराबर किंतु विपरीत प्रकृति के आवेश होते हैं| जब एक इलेक्ट्रॉन तथा एक पॉजिट्रॉन परस्पर संपर्क में आते हैं तो दोनों एक दूसरे को नष्ट करके ऊर्जा में बदल जाते हैं| इलेक्ट्रॉन और पॉजिट्रॉन के आवेशो का योग शून्य होता है, जो उनके ऊर्जा में बदलने पर शून्य ही रहता है|

2) नाभिकीय अभिक्रियाओं में भी आवेशों का संरक्षण होता है, जैसे नाभिकीय विखंडन की घटना में--


3*आवेश का क्वाण्टीकरण (QUANTISATION OF CHARGE) 
आवेश का वह न्यूनतम मान ( मुल आवेश) जिसका आदान- प्रदान प्रकिया मे उपयोग किया जाता है, उसे उस भौतिक राशि का क्वांटम तथा इस प्रक्रिया को आवेश का क्वांटीकरण कहते हैं|
#:- इस न्युनतम आवेश को मुल आवेश कहा जाता है|

                      
          मुल आवेश  (कूलॉम्ब में)=e= 1.6×10−19 C            

2. किसी भी आवेश को अनिशिचत रूप में विभाजित नहीं की जा सकती है, इसके न्यूतम मान को मौलिक आवेश कहा जाता है, इस क्रिया को विधुत आवेश का क्वांटीकरण कहा जाता है|

3. आवेश का वह न्यूनतम मान (e) जिसका आदान-प्रदान प्रक्रिया में उपयोग किया जा सकता है उसे उस भौतिक राशि का क्वाण्टम तथा इस प्रक्रिया को क्वांटीकरण कहते है। आवेश का स्थानांतरण e के गुणज के रूप में होता है तथा न्यूनतम मान 1e होता है। उदाहरण : ... एक समान वेग से गतिशील आवेश वैधुत क्षेत्र तथा चुंबकीय क्षेत्र दोनों उत्पन्न करता है। 
                

May 31, 2021

कूलॉम के नियम का सदिश स्वरूप, कूलॉम के नियम का सदिश रूप, (Vector from of Coulomb`s Law)

कूलॉम के नियम का सदिश स्वरूप :-
कूलॉम के नियम के अनुसार दो बिंदु आवेश q1 & q2 के मध्य लगने वाला विद्युत बल दोनों के परिमाण के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी(r )के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।यह बल आवेशो को मिलाने वाले रेखा के अनुदिश होता है|

आवेश धनात्मक या ऋणात्मक कुछ भी हो सकता है अतः आवेशों के परिमाण को |q1| & |q2में प्रयोग किया गया है।
है

हम जानते हैं कि बल सदिश राशि है इसलिए हम कूलॉम के नियम का सदिश रूप में लिखा जा सकता हैं,माना दो आवेश q1 & qहै तथा दोनों की प्रकृति समान है 

अब हम चित्र से स्पष्ट करेंगे
 मानाकि xy एक रेखा है, इस रेखा पर A और B बिंदु पर q1 और q2 आवेश है तथा A और B के बीच की दूरी r है।
q1 आवेश के कारण q2 पर क्रियाशील विद्युतीय बल
पुनः
q2 आवेश के कारण q1 पर क्रियाशील बल
                                       (B से A की और) 
समीकरण (1) और (2) से दोनों बल का परिमान समान है दिशा विपरीत है|

                     #Kulam ka niyam#

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May 31, 2021

विद्युत बल रेखाएं, विद्युत क्षेत्र रेखाएं, परिभाषा व रेखाओ के गुणधर्म या विशेषताएं, electric field lines of force , Electric Field-lines,in hindi

विधुत बल रेखाएं:-
विधुत क्षेत्र रेखाएं वे काल्पनिक रेखाएं है, जिनकी सीधी रेखाएं या वक्र रेखा पर खीची गई स्पर्श रेखाएं विधुत क्षेत्र के तीव्रता के दिशा को सूचित करता है|

विद्युत बल रेखाए के गुण : -
 i) विद्युतीय बल रेखाओ की संख्या आवेश के परिमाण का समानुपाती होती है|
ii) विद्युतीय बल रेखाएं एक - दूसरे को नहीं काटती है।
   क्योकि ऐसा होने पर एक ही एक ही बिन्दु पर विद्युतीय क्षेत्र की दो दिशा होगी जो संभव नहीं है।
iii) जब हमारे पास एकल ॠणावेश हो तो विधुत बल रेखाएं आवेश के अनंत से होकर आरंभ तक आती है, लेकिन जब हमारे पास एकल धनावेश हो तो विधुत बल रेखाएं आवेश के आरंभ से होकर अनंत तक जाती है|
अब हम इसे चित्र से स्पष्ट करते हैं|
iv) वह काल्पनिक रेखा है जो धनावेश से निकलकर हवा माध्यम द्वारा ऋणावेश में प्रवेश करती है,उसे विधुत बल रेखाएं ‌‌‌कहते हैं|
विद्युत क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर स्पर्श रेखा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है|

iv) जब हमारे पास दो धनावेश हो तो विधुत बल रेखाएं आवेश से प्रतिक्रर्षण होकर विधुत बल रेखाएं धनावेश से निकलकर अनंत की और जाती है, लेकिन जब हमारे पास दो ॠणावेश हो तो विधुत बल रेखाएं आवेश से प्रतिक्रर्षण  होकर विधुत बल रेखाएं ॠणावेश अनंत से ॠणावेश की और जाती है|
v) ढो समान आवेश के कारण विकर्षण / प्रतिकर्षण होती है, जिसके कारण उन दोनो आवेशो के बीच एक उदासीन बिन्दु होती है।

#:- उदासीन बिन्दु पर विद्यतीय बल या विधुतीय तीव्रता शून्य होती है ।
 क्योकि आवेश पर इलेक्ट्रॉन तथा प्रॉटोन का मान बराबर होता है , इलेक्ट्रॉन पर - चार्ज होता है। लेकिन प्रोटॉन पर + चार्ज होता है। इसलिए उदासीन बिन्दु पर विधुतीय बल तथा विधुतीय तीव्रता शून्य होती है।

vi) किसी बिन्दु के चारो और के इकाई क्षेत्रफल से लम्बवत् गुजरने वाली विधुतीय बल रेखाओ की संख्या को विधुतीय क्षेत्र का परिमाप कहते है|
viii) समरूप क्षेत्र में खीची गई बल रेखाएं परस्पर समानान्तर होती है, तथा एक- दूसरे से समान दूरी पर होती है।
विधुतीय बल रेखाएं विधुतीय बल तथा विधुतीय तीव्रता की दिशा को बताती है।
ix) विद्युतीय बल रेखाएं बन्द लुप नही बनाती है।
X) विधुतीय क्षेत्र रेखाएं विधुतीय क्षेत्र में इकाई धन आवेश का गतिपथ होता है।